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विशेष रिपोर्ट: लालू प्रसाद दे रहे हैं M-Y समीकरण को प्राथमिकता लेकिन तेजस्वी के A TO Z का भी रख रहे हैं ख्याल

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जे. पी.चन्द्रा की रिपोर्ट

बिहार नेशन: बिहार में राजनीतिक उठापटक समाप्त होने के बाद अब मंत्रिमंडल गठन को लेकर मंथन तेज हो गया है। राजद सुप्रीमों लालू प्रसाद यादव मंथन में जुटे हैं। उन्हें पुत्र तेजस्वी की पसंद की टीम बनाना है ताकि पुरानी और नई पीढ़ियों में सामंजस्य रहे और संतुलन बना रहे। क्योंकि राजद के सामने लालू के माय (मुस्लिम-यादव) समीकरण के साथ तेजस्वी के एटूजेड (सभी जातियों का प्रतिनिधित्व) के नारे का भी ख्याल करना है। साथ ही पिछली बार विधानसभा चुनाव में राजद को सबसे अधिक सीट मगध एवं पटना प्रमंडल में मिला था। उसका भी ख्याल रखना है और सीमांचल के गढ़ को भी बचाना है।

वहीं लालू-तेजस्वी की पहली प्राथमिकता अपने वोट बैंक को बचाए-बनाए रख कर भाजपा के आधार वोट में सेंधमारी करने की है। राजद के वोट बैंक पर दशक भर से भाजपा की नजर है। कई बार सेंध लगाने की कोशिश भी की गई। आगे भी इन्कार नहीं किया जा सकता। इसलिए तेजस्वी अपने इस वोट बैंक को सबसे ज्यादा प्रतिनिधित्व देंगे। इस वर्ग से भाई वीरेंद्र, ललित यादव और प्रो. चंद्रशेखर समेत कई नेता लाइन में है। तेजस्वी के करीबी विधायक भाई वीरेंद्र की अपनी पहचान है और ललित यादव दरभंगा ग्रामीण से लगातार जीतकर संभावनाओं में बने हुए हैं। सारण के रामानुज प्रसाद भी चार बार से लगातार जीतकर आगे चल रहे हैं। तेज प्रताप यादव की दावेदारी में तो कोई किंतु-परंतु है ही नहीं।

वहीं अवध बिहारी चौधरी स्पीकर बनने की दौड़ में हैं। अगर नहीं बन पाए तो मंत्री बनना तय है। दूसरी प्राथमिकता मुस्लिमों को मिल सकती है। अख्तरूल इस्लाम शाहीन का नाम सबसे आगे है। वह राजद के सभी 12 मुस्लिम विधायकों में सबसे ज्यादा तीन बार लगातार जीतकर आए हैं। दूसरा नाम सीमांचल से स्व. तस्लीमुद्दीन के पुत्र शाहनबाज का है। वे असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी छोड़कर हाल ही में राजद में आए चार विधायकों में एक हैं। इनकी सीमांचल में पकड़ है। नरकिटया से शमीम अहमद का नाम भी चल रहा है। राजद कम से कम दो मुस्लिमों को मंत्री बना सकता है।

राजद की दूसरी प्राथमिकता भाजपा के आधार वोट में सेंध लगाने की होगी। इसमें वैश्य समुदाय से समीर महासेठ और रणविजय साहू की दावेदारी है। लालू परिवार के समीर पुराने विश्वसनीय हैं। वहीं राजद कोटे से तय नामों में आलोक मेहता सबसे ऊपर चल रहे हैं।
अति पिछड़े वर्ग में नोखा विधायक अनीता देवी, कुढ़नी के अनिल सहनी और भभुआ के भरत बिंद में से किसी दो पर दांव लगना तय माना जा रहा है। अनिल मल्लाह जाति से आते हैं। मसौढ़ी की रेखा पासवान और बोधगया के कुमार सर्वजीत में से किसी एक को  मंत्री बनाया जा सकता है। दोनों पासवान हैं।

वहीं तेजस्वी का नारा ए टू जेड पार्टी की रही है। ऐसे में इस कोटे से भी मंत्री बनाया जा सकता है। इसमें विधान पार्षद सुनील कुमार सिंह एवं जगदानंद सिंह के पुत्र सुधाकर सिंह भी दौड़ में हैं। लेकिन इन दोनों में किसी एक ही बनाया जा सकता है। जबकि राबड़ी देवी के काफी करीब सुनील सिंह के होने के कारण उनकी दावेदारी मजबूत मानी जा रही है। जबकि भूमिहार कोटे से कर्तिक कुमार या सौरभ, ब्राह्मण वर्ग से राहुल तिवारी या बच्चा पांडेय में किसी एक को मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है।

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