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DM. सौरभ जोरवाल ने किया कृषि विज्ञान केन्द्र सिरिस में स्थापित मौसम यूनिट का निरीक्षण

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जे.पी.चन्द्रा की रिपोर्ट

बिहार नेशन: बिहार के कई जिले सुखे की चपेट में हैं। वहीं औरंगाबाद जिला भी इसी तरह की समस्या से जूझ रहा है। मौसम में आए बदलाव के कारण किसानों के सामने कृषि कार्य को लेकर गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है। इसी सुखे की स्थिति और जिले में वर्षा के आसमान वितरण को लेकर जिलाधिकारी सौरभ जोरवाल एवं  जिला कृषि पदाधिकारी रणवीर सिंह ने कृषि विज्ञान केन्द्र सिरिस में स्थापित मौसम यूनिट का निरीक्षण किया और उसकी जानकारी ली। कृषि मौसम वैज्ञानिक डॉ० अनूप कुमार चौबे द्वारा सर्वप्रथम भारत मौसम विज्ञान विभाग द्वारा जारी मौसम पूर्वनुमान डेटा के बारे में जानकारी दी गई की किस तरह से मौसम पूर्वनुमान डेटा  भारत मौसम विज्ञान विभाग के वेवसाईट से प्राप्त करते है।

इस दौरान उन्होंने वर्षा, अधिकतम एवं न्यूनतम तापमान, अधिकतम एवं न्यूनतम आद्रता, हवा की गति, हवा की दिशा एवं बादल छाए रहने की अवस्था आदि के बारे में विस्तृत जानकारी दिया। साथ ही ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि इस मशीन से वर्षा, अधिकतम एवं न्यूनतम तापमान, अधिकतम एवं न्यूनतम आद्रता, हवा की गति, हवा की दिशा, मृदा में उपस्थित नमी, मृदा का तापमान आदि 15 -15 मिनट के अंतराल पर दर्ज होता है जिसका डेटा वेवसाईट के माध्यम से भी देख सकते है।

साथ ही अगले पाँच दिन के मौसम पूर्वनुमान के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि हल्की बारिश की संभावना है। लेकिन इस बारिश से धान की रोपाई कर पाना सम्भव नही है। सप्ताह में दो दिन मंगलवार एवं शुक्रवार को कृषि सलाह बुलेटिन सभी प्रखण्ड को भेजा जाता है जिसमे अगले 5 दिन का मौसम पूर्वनुमान के साथ साथ कृषि में किए जाने वाले कार्यो की भी विधिवत जानकारी किसानों को दी जाती है।

जिलाधिकारी सौरभ जोरवाल ने कृषि विज्ञान केन्द्र के द्वारा किये जा रहे कार्यो की सराहना करते हुए कहा कि जून एवं जुलाई माह में कम वर्षा की स्थिति को देखते हुए आने वाले दिनों में धान की फसल की रोपाई पर क्या प्रभाव पढ़ेगा एवं अगले 10 से 15 दिन में बारिश कम या नही होने पर जिला कृषि पदाधिकारी एवं कृषि विज्ञान केन्द्र, सिरिस के वैज्ञानिक संयुक्त रूप से वैकल्पिक फसल के बारे में प्लानिंग करने के लिए निर्देश दिया।

डीएम ने आगे कहा कि ऐसी फसलों का चयन करें जिससे आनेवाले समय में अगर वर्षा की कमी होती है तो उसका विकल्प ढूंढा जा सके । वहीं कम वर्षा में भी उत्पादन किया जा सके। इस मौके पर केंद्र के वैज्ञानिक
और जिला कृषि कार्यालय के पदाधिकारी मौजूद रहे ।

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