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Exclusive: आखिर यूक्रेन में ही MBBS की पढ़ाई करने क्यों जाते हैं बिहार, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश समेत कई राज्यों के छात्र,पढें

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जे. पी.चन्द्रा की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट

बिहार नेशन: रूस और यूक्रेन के बीच जंग जारी है। इस जंग में भारत सहित कई देशों के छात्र एवं नागरिक फंसे हैं । भारत से बड़ी संख्या में छात्र वहाँ मेडिकल की पढ़ाई करने जाते हैं । वे अभी वहीं फंसे हैं और अपने सुरक्षित लौटने के लिए भारत सरकार से गुहार लगा रहे हैं ।

यूक्रेन में फंसे छात्र का परिवार

लेकिन एक सवाल जरूर आपके जेहन में कौंधता होगा कि ये छात्र मेडिकल की पढ़ाई वहाँ से ही क्यों करना चाहते हैं ?  क्या भारत में मेडिकल की पढ़ाई नहीं होती है? क्या भारत से अधिक सुविधाएं वहां पढ़ाई की छात्रों को मिलती है ?  क्या वहाँ जैसी सुविधाएं मेडिकल के छात्रों को अपने देश में नहीं मिल सकती हैं ?  तो आइये इसे हम समझते हैं ।

यूक्रेन और रूस के बीच लड़ाई शुरू होने के बाद वहां फंसे भारतीय छात्रों की चिंता बड़ा मुद्दा बन गई है। शिक्षा एवं विज्ञान मंत्रालय के अनुसार, यूक्रेन में 18 हजार से ज्यादा भारतीय छात्र-छात्राएं पढ़ाई करते हैं। वहीं एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय छात्रों के यूक्रेन में खासकर मेडिकल की पढ़ाई करने की सबसे बड़ी वजह ये है कि वहां मेडिकल में भारत जैसी प्रतिस्पर्धा नहीं है। साथ ही यूक्रेन की मेडिकल डिग्री की मान्यता भारत की इंडियन मेडिकल काउंसिल के साथ ही वर्ल्ड हेल्थ काउंसिल, यूरोप, यूके आदि सभी जगह पर है। मतलब यूक्रेन से मेडिकल की पढ़ाई करने वाले छात्र दुनिया के किसी भी हिस्से में मेडिकल प्रैक्टिस कर सकते हैं । वहीं रिपोर्ट के अनुसार, यूक्रेन में मेडिकल की पढ़ाई करने का दूसरा सबसे बड़ा कारण वहां का कम खर्च है।

 

यूक्रेन में फंसी मध्यप्रदेश की MBBS छात्रा

दरअसल भारत में एक प्राइवेट कॉलेज से एमबीबीएस की डिग्री की पढ़ाई करने में सालाना 10-12 लाख रुपए का खर्च है जो कि चार साल के कोर्स का करीब 50 लाख रुपए बैठता है। सरकारी कॉलेजों में यही फीस 2 लाख रुपए सालाना है लेकिन वहां सीटें काफी कम हैं और प्रतिस्पर्धा बहुत ज्यादा। यही वजह है कि छात्र यूक्रेन का रुख करते हैं।

यूक्रेन में फंसा औरंगाबाद का MBBS छात्र संदीप कुमार

बता दें कि यूक्रेन के कॉलेजों में एमबीबीएस की पढ़ाई की सालाना फीस 4-5 लाख रुपए है, जो कि भारत के मुकाबले काफी कम है। भारत में जहां नीट की परीक्षा में अच्छी रैंक आने पर ही मेडिकल कॉलेज में एडमिशन मिलता है लेकिन यूक्रेन में अगर किसी छात्र ने नीट क्लीयर कर लिया है और उसकी रैंक अच्छी नहीं भी है तब भी आसानी से एडमिशन मिल सकता है।

मेडिकल कॉलेज

इन सभी चीजों से भी बड़ी बात यह है कि यूक्रेन में भारत के मुकाबले प्रैक्टिकल नॉलेज पर अधिक ध्यान दिया जाता है। साथ ही वहां के कॉलेजों में इन्फ्रास्ट्रक्चर भारत के मुकाबले अधिक बेहतर है। यही कारण है कि बिहार, मध्यप्रदेश, पंजाब, छतीसगढ़ , महाराष्ट्र सहित कई राज्यों के छात्र वहाँ बड़ी संख्या में जाकर मेडिकल की पढ़ाई करते हैं ।

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