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एक्सक्लूसिव खबर: बिहार में हो गया मंत्रिमंडल विस्तार, देखिए पूरी लिस्ट किसे कौन सा विभाग मिला

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जे.पी.चन्द्रा की एक्सक्लूसिव खबर

बिहार नेशन: बिहार में आज यानी 16 अगस्त दिन मंगलवार को मंत्रिमंडल का विस्तार नये सरकार में कर दिया गया है। इससे पहले सीएम नीतीश कुमार ने 10 अगस्त को बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में आठवीं बार शपथ ली थी। वहीं आज उन्होंने मंत्रिमंडल का विस्तार किया। यह भी बता दें कि नीतीश कुमार के साथ तेजस्वी यादव ने भी उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। मालूम हो कि महगठबंधन के अलग-अलग दलों के विधायकों ने मंत्री पद की शपथ ली।

वहीं सबसे पहले पांच मंत्रियों ने पद की शपथ ली। इसमें सबसे पहले राजद के तेज प्रताप यादव और आलोक मेहता, जदयू के विजय चौधरी और बिजेंद्र यादव एवं कांग्रेस के अफाक आलम ने शपथ ली है। नीतीश-तेजस्वी कैबिनेट में कुल 31 मंत्रियों ने शपथ ली है।

इसके बाद जदयू के अशोक चौधरी, श्रवण कुमार और लेशी सिंह और राजद के सुरेंद्र यादव और रामांनद यादव ने शपथ ली है।

इसके बाद राजद के ललित यादव और कुमार सर्वजीत, जदयू के संजय झा और मदन सहनी एवं हम के संतोष सुमन ने शपथ ली। राजद के समीर महासेठ और चंद्रशेखर, जदयू की शीला मंडल सुनील कुमार एवं निर्दलीय सुमित कुमार सिंह ने पद की शपथ ली।

राजद की अनिता देवी, जीतेंद्र कुमार राय और सुधाकर सिंह एवं जदयू के जमा खान और जयंत राज ने शपथ ली। वहीं राजद के कार्तिकेय कुमार सिंह, समीम अहमद, सुरेंद्र राम, शहनवाज और इसराइल मंसूरी एवं कांग्रेस से मुरारी गौतम ने पद की शपथ ली।

मंत्रिमंडल विस्‍तार के शपथ ग्रहण समारोह में आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के शामिल होने की उम्‍मीद थी। लेकिन तबीयत ठीक नहीं रहने के कारण उनके कार्यक्रिम पर ग्रहण लगता दिख रहा है। अब बताया जा रहा है कि वे दिल्‍ली से पटना नहीं आ रहे हैं।

इस प्रकार राजद कोटे से 16, जदयू कोटे से 11, कांग्रेस से दो और हम से एक व एक निर्दलीय मंत्रिमंडल में शामिल हुए हैं। राज्यपाल फागू चौहान ने सभी को शपथ दिलाई। इस समारोह में सीएम नीतीश, डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव समेत जदयू-राजद के बड़े नेता शामिल हुए।

वहीं विभागों का बंटवारा भी कर दिया गया है। जिसमें
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पास गृह, सामान्य प्रशासन विभाग, मंत्रिमंडल सचिवालय, निगरानी, निर्वाचन समेत वे सभी विभाग रहेंगे जो किसी को आवंटित नहीं किए गए हैं। वहीं डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव के पास स्वास्थ्य, पथ निर्माण, नगर विकास एवं आवास और ग्रामीण कार्य विभाग का जिम्मा रहेगा।

जबकि विजय कुमार चौधरी को वित्त, वाणिज्य कर और संसदीय कार्य विभाग का मंत्री बनाया गया है। बिजेंद्र प्रसाद यादव को ऊर्जा और योजना एवं विकास विभाग का मंत्री बनाया गया है, आलोक मेहता राजस्व और भूमि सुधार विभाग के मंत्री बनाए गए हैं। वहीं तेजप्रताप यादव को पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की जिम्मेवारी मिली है। अफाक आलम को पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग का मंत्री बनाया गया है, अशोक चौधरी भवन निर्माण विभाग के मंत्री बनाए गए हैं जबकि श्रवण कुमार को ग्रामीण विकास विभाग का मंत्री बनाया गया है।

आरजेडी कोटे से मंत्री बने सुरेन्द्र यादव को सहकारिता विभाग का मंत्री बनाया गया है। वहीं रामानंद यादव को खान एवं भूतत्व विभाग का मंत्री बनाया गया है। लेसी सिंह खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की मंत्री बनाई गईं हैं। जबकि मदन सहनी को समाज कल्याण विभाग का मंत्री बनाया गया है वहीं कुमार सर्वजीत को पर्यटन विभाग का जिम्मा सौंपा गया है।

ललित यादव को लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग का मंत्री बनाया गया है। वहीं संतोष कुमार सुमन अनुसूचित जाति-जनजाति कल्याण मंत्री बनाए गए हैं। संजय कुमार झा को जल संसाधन और सूचना जन संपर्क विभाग का जिम्मा सौंपा गया है। शीला मंडल परिवहन विभाग की मंत्री बनाई गई हैं जबकि समीर महासेठ को उद्योग विभाग का मंत्री बनाया गया है।

प्रो. चंद्रशेखर बिहार के नये शिक्षा मंत्री बनाए गए हैं, सुमित कुमार सिंह को विज्ञान एवं प्रावैधिकी विभाग, सुनील कुमार को मद्य निषेद्य, उत्पाद एवं निबंधन विभाग, अनिता देवी को पिछड़ा वर्ग एवं अतिपिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग, जितेन्द्र कुमार राय को कला संस्कृति एवं युवा विभाग, जयंत राज को लघु जल संसाधन विभाग, सुधाकर सिंह को कृषि विभाग, जमा खान को अल्पसंख्यक कल्याण विभाग, मुरारी प्रसाद गौतम को पंचायती राज विभाग का मंत्री बनाया गया है।

जबकि कार्तिक कुमार को विधि विभाग, शमीम अहमद को गन्ना उद्योग विभाग, शाहनवाज को आपदा प्रबंधन विभाग, सुरेंद्र राम को श्रम विभाग, मो.इसराईल मंसूरी को सूचना प्रावैधिकी विभाग का मंत्री बनाया गया है। शपथ लेने वाले नीतीश कैबिनेट के कुल 31 मंत्रियों के बीच विभागों का बंटवारा कर दिया गया है।

आपको बता दें कि पहले से ही यह कयास लगाया जा रहा था कि मंत्रिमंडल का विस्तार 15 अगस्त यानी स्वतंत्रता दिवस के बाद कभी भी किया जा सकता है। क्योंकि इसके लिए तेजस्वी अपने पिता लालू प्रसाद से नामों की सूची पटना विचार-विमर्श करने के लिए दिल्ली गये थे।

 

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