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जेडीयू नेता आरसीपी सिंह ने चिराग पर कसा तंज,कहा-जो आप बोइएगा वही न काटिएगा

बिहार में राजनीतिक घमासान जारी है। लोजपा के पांचों सांसदों के बगावती सुर पर जेडीयू को भी बोलने का मौका मिल गया है। जेडीयू के कद्दावर नेता आरसीपी सिंह ने अब बड़ा बयान दिया है।

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जे.पी.चन्द्रा की रिपोर्ट

बिहार नेशन: बिहार में राजनीतिक घमासान जारी है। लोजपा के पांचों सांसदों के बगावती सुर पर जेडीयू को भी बोलने का मौका मिल गया है। जेडीयू के कद्दावर नेता आरसीपी सिंह ने अब बड़ा बयान दिया है। उन्होंने इस मामले पर कहा की जो आप बोइएगा वही न काटेंगे । जेडीयू नेता ने कहा की रामविलास पासवान अच्छे नेता थे  । 2019 में मिलकर लड़ने पर उनकी पार्टी को 39 सीट मिली थी ।लेकिन अगर बिना मेहनत के पद मिल जाता है तो उसे पचाना आसान नहीं होता है। आरसीपी सिंह ने कहा की पिछले विधानसभा चुनाव में चिराग पासवान ने पार्टी के नेताओं की भावनाओं का न ख्याल रखते हुए अलग चुनाव लड़ने का फैसला लिया । लेकिन उनसे परेशान पार्टी के नेताओं ने अब जाकर फैसला लिया है।

इस दौरान उन्होंने एक बात और कहा की एनडीए में दो दल हैं  भाजपा और जेडीयू । नाराज सांसद जहाँ भी जाएंगे उनका स्वागत किया जाएगा । उन्होंने कहा कि नाराज सांसद एनडीए में थे । उन्होंने कहा की राजनीति में लम्बी रेस का घोड़ा बनने के लिये स्थिर होना पड़ता है। ऐसा नहीं होता है की सुबह कुछ और शाम में कुछ । राजनीति में ऐसा नहीं चलता है। सिंह ने कॉंग्रेस के मुद्दे पर कहा की कौन चाहता है की डूबते नौका की सवारी करें । बंगाल के विधानसभा चुनाव में सभी ने देखा कि कॉंग्रेस की क्या स्थिति हुई है। अगर कॉंग्रेस से कोई नेता एनडीए में आना चाहता है तो उसका स्वागत है।

आपको बता दें कि इस समय एलजेपी में भारी टूट की खबर है.  एलजेपी के पाँचों सांसदों ने पशुपति कुमार पारस को अपना नेता चुन लिया है. लेकिन इसपर पशुपति कुमार पारस का कोई बयान नहीं आ रहा था. लेकिन अब उन्होंने पहली बार अपनी चुपी तोड़ते हुए कहा है कि उन्होंने यह फैसला मजबूरी में लिया है. वे पार्टी को खत्म होते हुए नहीं देखना चाहते हैं. उनका यह निर्णय पार्टी के हित के लिए है.

पशुपति कुमार पारस ने कहा कि वे घुटन महसूस कर रहे थें. उन्होंने यह भी कहा कि अपने भाई दिवंगत रामविलास पासवान की 8 अक्टूबर 2020 के निधन के बाद चिराग द्वारा कुछ ऐसे गलत फैसले लिए गये की पार्टी विलुप्त होने के कगार पर पहुँच गई है. बता दें कि पशुपति कुमार पारस ने बिहार विधानसभा चुनाव के समय सीएम नीतीश कुमार के कामों की काफी तारीफ़ की थी. जिसके बाद उन्हें पार्टी के नाराजगी का काफी सामना करना पड़ा था. बाद में उन्होंने अपनी बयान पर पार्टी से कारण बताओं नोटिस भेजने के बाद सफाई दी थी. उसी समय से ये पार्टी के नेता नाराज बताये जा रहे थें.

 

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