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औरंगाबाद की मोनिका समेत मिलिए 66 वीं BPSC के अन्य टॉपर से, ऐसी है सभी टॉपर्स के संघर्ष की कहानी

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जे.पी.चन्द्रा की रिपोर्ट

बिहार नेशन: बिहार लोक सेवा आयोग यानी बीपीएससी ने 66 वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा 2022 का रिजल्ट बुधवार को जारी किया है जिसमें 685 अभ्यर्थियों का चयन किया गया है। इस परीक्षा में सुधीर कुमार ने टॉप किया है।आधिकारिक वेबसाइट bpsc.bih.nic.in पर जाकर परीक्षा का रिजल्ट चेक कर सकते हैं।

बीपीएससी 66वीं परीक्षा के टॉपर्स की लिस्ट

रैंक 1- सुधीर कुमार, वैशाली (Sudhir Kumar, Vaishali)

रैंक 2- अंकित कुमार, नालंदा (Ankit Kumar, Nalanda)

रैंक 3- ब्रजेश कुमार,अररिया (Brajesh Kumar, Araria)

रैंक 4- अंकित सिन्हा, औरंगाबाद (Ankit Sinha, Aurangabad)

रैंक 5- सिद्धान्त कुमार , पटना (Siddhant Kumar, Patna)

रैंक 6- मोनिका श्रीवास्तव , औरंगाबाद (Monika Srivastava, Aurangabad)

रैंक 7- विनय कुमार रंजन, पटना (Vinay Kumar Ranjan, Patna)

रैंक 8- सदानंद कुमार, पूर्वी चंपारण (Sadanand Kumar, East Champaran)

रैंक 9- आयुष कृष्णा, मुजफ्फरपुर (Ayush Krishna, Muzaffarpur)

रैंक 10- अमर्त्य कुमार आदर्श, अरवल (Amartya Kumar Adarsh, Arwal)
इन टॉपर्स में कुछ की दास्तां से हम आपको रूबरू करा रहे हैं। जानिए उसके संघर्ष की कहानी

सुधीर कुमार (रैंक -01)

सुधीर कुमार का कहना है कि सफलता कभी भी शॉर्टकट से नहीं मिलती। सामान्य ज्ञान वाले किताबों के भरोसे ही नहीं रहना चाहिए, क्योंकि लिखित परीक्षा के लिए उतनी जानकारी काफी नहीं होती है। सुधीर ने महुआ के एक प्राइवेट स्‍कूल से मैट्रिक की इसके बाद बिहार बोर्ड से इंटर की परीक्षा पास की। इसके साथ ही उन्‍होंने जेईई भी क्वॉलिफाई कर लिया है।

सुधीर ने सिविल इंजीनियरिंग में आइआइटी कानपुर (IIT Kanpur) से स्नातक की डिग्री हासिल की, इसके बाद यूपीएससी की तैयारी करने दिल्ली चले गए। उन्होंने यूपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा भी पास कर ली है।

बता दें कि सुधीर के पिता वीरेंद्र कुमार महुआ पोस्ट ऑफिस में कार्यरत हैं, जबकि मां प्रमिला कुमारी राजापकड़ में एएनएम हैं। उनकी दो बड़ी बहनें भी हैं। सुधीर ने बताया कि यूपीएससी हो या बीपीएससी, वे बिहार में ही सेवा देना चाहते हैं।

सिद्धांत कुमार ने पाई 5वीं रैंक (रैंक 5)

सिद्धांत कुमार ने बीपीएससी में पांचवी रैंक पाई है।वे राजधानी के कंकड़बाग निवासी हैं। इनके पिता दुकानदार श्यामनंदन सिंह की हार्डवेयर की दुकान है। भोपाल से एमबीए किया है। 2017 में कोच्ची विश्वविद्यालय से बीटेक इलेक्ट्रानिक्स एवं कम्युनिकेशन की पढ़ाई की। सफलता का श्रेय पिता श्याम नंदन सिंह, मां रंजू सिंह व शिक्षकों को दिया है। सिद्धांत यूपीएससी की तैयारी में जुटे हैं। पहले भी यूपीएससी के साक्षात्कार तक पहुंच चुके हैं।

पहले प्रयास में ही औरंगाबाद की मोनिका श्रीवास्तव को मिली सफलता, पाई छठी रैंक (रैंक 6)

औरंगाबाद की रहने वाली मोनिका श्रीवास्तव अपने पहले प्रयास में ही बीपीएससी क्रैक कर सहायक राज्य कर आयुक्त बनी हैं। वर्ष 2016 में आइआइटी गुवाहाटी से कम्प्यूटर साइंस से इंजीनियरिंग के बाद चेन्नई में साफ्टवेयर इंजीनियर हैं।

मोनिका ने जॉब के साथ-साथ हर दिन सेल्फ स्टडी की। छुट्टी के साथ-साथ शनिवार-रविवार को 10-12 घंटे पढ़ाई करती थी। वह आरंभ से ही बिहार आना चाहती थीं। उनका लक्ष्‍य यूपीएससी है।

विनय कुमार रंजन अब बनेंगे डीएसपी (रैंक 7)

विनय कुमार रंजन को बीपीएससी में पांचवीं रैंक मिली है। आइआइटी दिल्ली से एमटेक करने वाले विनय रंजन फिलहाल राजधानी के कंकड़बाग में जेईई-नीट नामांकन के लिए बच्चों को तैयारी कराते हैं। विनय मूल रूप से जमालपुर के नया गांव के रहने वाले हैं। पिता जीतन यादव बैंक से सेवानिवृत होकर अब सामाजिक कार्यों में है।

अमर्त्य कुमार ने पाई 10वीं रैंक (रैंक 10)

अमर्त्य कुमार आदर्श को 66वीं बीपीएससी परीक्षा में दसवीं रैंक पाई है। अरवल के कुर्था निवासी आदर्श को 63वीं संयुक्त परीक्षा में वित्त सेवा में पोस्टिंग मिली थी। वह फिलहाल वह पटना में ही पदस्थापित हैं। इसके बाद से वह लगातार तैयारी में लगे थे। उन्‍होंने 2008 में भारतीय वायु सेना में योगदान दिया। इसके बाद नालंदा खुला विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन की। इसके बाद 2017 में बैकिंग में लेकिन इसी साल 2017 में ही बैंक की नौकरी छोड़ दी । फिर सिव‍िल सेवा की तैयारी के लिए दिल्‍ली गए।वर्ष 2019 में 63वीं बीपीएससी में चयन हुआ।

आपको बता दें कि 66वीं संयुक्त प्रतियोगी मेन परीक्षा का आयोजन 2021 में विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर 29, 30, 31 जुलाई आयोजित हुई थी।इस बार की परीक्षा में एक बात निकलकर सामने आ रही है कि इंजीनियरिंग के छात्रों ने टॉप 10 में बाजी मारी है। टॉप 10 में सफल अभ्यर्थी बीटेक डिग्री धारक ही हैं। एक बात और है इस बार की परीक्षा में ग्रामीण परिवेश के छात्रों ने सफलता का परचम लहराया है।

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