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नहीं रहे बॉलीवुड के मशहूर सिंगर और कंपोजर बप्पी लहरी, 69 वर्ष की उम्र में निधन

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जे.पी.चन्द्रा की रिपोर्ट

बिहार नेशन: बॉलीवुड के मशहूर सिंगर और कंपोजर का 69 वर्ष की उम्र में निधन हो गया है।उन्होंने अंतिम साँस मुंबई के क्रिटी केयर अस्पताल में ली। वे करीब एक महीने से बीमार थे। हालांकि सोमवार को उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया था लेकिन उनकी हालत खराब होती जा रही थी। लता मंगेशकर के निधन के एक हफ्ते बाद ही आई इस बुरी खबर ने हर किसी को हैरान कर दिया है। जानकारी के मुताबिक, बप्पी लहरी का निधन मंगलवार रात करीब 11 बजे हुआ। मशहूर गायक ‘ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एप्निया’ (ओएसए) नाम की बीमारी से जूझ रहे थे।

बप्पी लहरी

बता दें ये ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एप्निया’ बीमारी में नींद के दौरान सांस लेने में बार-बार रुकावट होती है। इसके कुछ कारणों में अधिक वजन, जीभ का बड़ा आकार और टॉन्सिल प्रमुख होते हैं। ओएसए की वजह से रक्त में ऑक्सीजन का स्तर घट जाता है और नींद में बाधा पड़ने से हृदय रोग और उच्च रक्तचाप का जोखिम भी बढ़ने लगता है।अगर हम बप्पी लहरी के बारे में बात करें तो उनका जन्म 27 नवंबर 1952 को पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी में हुआ था और उनके पेरेंट्स ने उनका नाम आलोकेश लहरी रखा था। उनके माता पिता अपरेश लहरी और बंसुरी लहरी दोनों ही बंगाली सिंगर और म्यूजिशियन थे और अपने माता-पिता की इकलौती संतान हैं।

बप्पी लहरी

बप्पी ने अपने संगीत करियर में अगल-अलग भाषाओं में 5 हजार से अधिक गीत संगीतबद्ध किए और कइयों में अपनी आवाज भी दी। बप्पी भारत के ऐसे पहले संगीतकार थे जिन्हें चाइना गोल्ड अवार्ड से सम्मानित किया गया था। उन्हें ये सम्मान डिस्को डांसर फिल्म के गाने- जिमी जिमी के लिए दिया गया था। इस गाने को एडम सैंडलर ने अपनी फिल्म जोहान में भी दोहराया था। यही नहीं उनका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज है। बतौर संगीतकार बप्पी लाहिरी ने एक साल में 33 फिल्में करने का गिनीज बुक वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया है। इसके साथ ही उनके पास 1983 से 1985 तक 12 सुपरहिट सिल्वर जुबली फिल्मों के लिए संगीत बनाने का रिकॉर्ड है।

सिंगर बप्पी लहरी ने 24 जनवरी 1977 को चित्रानी लहरी से शादी की । उनके नाम कई रिकॉर्ड भी हैं । जिसमें एक रिपोर्ट के मुताबिक 1986 में उन्होंने 33 फिल्मों में 180 गानें गाए। उनका ये रिकॉर्ड गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज है।मालूम हो कि किशोर कुमार बप्पी लहरी के मामा थे। बप्पी लहरी ने तीन साल की उम्र में तबला बजाना शुरू कर दिया था, जिसकी शिक्षा उनके पेरेंट्स ने उन्हें दी थी। वैसे तो बप्पी लहरी डिस्को स्टाइल गानों के लिए जाने जाते थे लेकिन उन्होंने कई मधुर गीतभी गाए जैसे चलते चलते और ज़ख्मी के गाने।

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