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लालू-शरद की 25 साल पुरानी दुश्मनी हुई खत्म, शरद यादव ने अपनी पार्टी का राजद में किया विलय, पूरी रिपोर्ट पढें

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जे.पी.चन्द्रा की रिपोर्ट

बिहार नेशन: इस वक्त बिहार की राजनीतिक गलियारे से बड़ी खबर सामने आ रही है। बिहार में शरद यादव की पार्टी एलजेडी का आज राष्ट्रीय जनता दल में विलय हो गया है। पार्टी का विलय दिल्ली स्थित अपने आवास पर आयोजित एक कार्यक्रम में शरद यादव ने किया । उन्होंने 2018 में नीतीश कुमार से अलग होकर अलग पार्टी बनाई थी। इसके साथ ही  शरद यादव की अब लालू यादव के साथ शुरू हुई उनकी 25 साल पुरानी राजनीतिक दुश्मनी भी समाप्त हो गई है।

इस मौके पर शरद यादव ने कहा कि, हमारी पार्टी का राजद में विलय विपक्षी एकता की दिशा में पहला कदम है। यह जरूरी है कि बीजेपी को हराने के लिए पूरे भारत में पूरा विपक्ष एकजुट हो जाए। अभी एकीकरण हमारी प्राथमिकता है, उसके बाद ही हम सोचेंगे कि एकजुट विपक्ष का नेतृत्व कौन करेगा।

शरद यादव ने राजद में विलय की घोषणा पहले ही कर दी थी। उन्होंने बुधवार को ट्वीट करके यह स्पष्ट कर दिया था। शरद यादव ने कहा था कि, “यह पूर्ववर्ती जनता दल के अलग-अलग संगठनों को एक साथ लाने के उनके प्रयासों का हिस्सा होगा। देश में मजबूत विपक्ष स्थापित करना समय की मांग है। इसलिए मैं इस दिशा में पूर्व जनता दल के साथ-साथ अन्य समान विचारधारा वाली पार्टियों को एकजुट करने के लिए लंबे समय से काम कर रहा हूं। इसलिए, मैंने अपनी पार्टी एलजेडी का राजद में विलय करने का फैसला किया है।”

बता दें कि जुलाई, 1997 में जनता दल के अध्यक्ष पद को लेकर लालू यादव और शरद यादव में ठन गई। उस समय जनता दल के कार्यकारी अध्यक्ष शरद यादव हुआ करते थे। लालू प्रसाद यादव ने अध्यक्ष पद को लेकर शरद यादव को चुनौती दे दी। इस चुनाव के लिए लालू प्रसाद यादव ने अपने सहयोगी रघुवंश प्रसाद सिंह को निर्वाचन अधिकारी बनाया था, शरद यादव इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट चले गए और सुप्रीम कोर्ट ने रघुवंश प्रसाद सिंह को हटाकर मधु दंडवते को निर्वाचन अधिकारी बना दिया। पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष रहते हुए शरद यादव ने पार्टी की कार्यकारिणी में अपने समर्थकों की संख्या इतनी कर ली थी कि लालू प्रसाद यादव को अंदाजा हो गया था कि अगर वे चुनाव लड़ेंगे तो उनकी हार होगी। इसलिए लालू ने अलग पार्टी राष्ट्रीय जनता दल बनाने का फैसला लिया।

राजद प्रमुख लालू प्रसाद ने 1997 में जनता दल छोड़ दिया था और इसके नेतृत्व के साथ अपने मतभेदों के कारण अपनी पार्टी बनाई थी क्योंकि चारा घोटाले के खिलाफ जांच में तेजी आई थी, जिसमें वह मुख्य आरोपी थे। शरद यादव को तब जनता दल के भीतर उनके प्रतिद्वंद्वी के रूप में देखा गया था और बाद में वह नीतीश कुमार के साथ 2005 में बिहार में राजद के 15 साल के शासन को समाप्त करने के अभियान में शामिल हो गए थे।

गौरतलब हो कि शरद यादव ने 2018 में सीएम नीतीश कुमार से राजनीतिक मतभेद होने के बाद अलग पार्टी लोकतांत्रिक जनता दल का गठन किया । लेकिन इसके बाद से उनकी राजनीतिक पकड़ ढीली पड़ती गई और राजनीतिक पतन शुरू हो गया । जब से उन्होंने जेडीयू से अलग रास्ता अपनाया अकेले चुनाव नहीं लड़ा। वहीं 2020 में शरद यादव की बेटी ने राजद की टिकट पर चुनाव लड़ा था।

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