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रक्षा बंधन: भाई की रक्षा के लिये बहना बांधती है कलाइयों पर राखी

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डॉ ओमप्रकाश कुमार, दाऊदनगर  

बिहार नेशन: रक्षा बंधन का शाब्दिक अर्थ रक्षा करने वाला बंधन मतलब धागा है। इस पर्व में बहनें अपने भाई के कलाई पर रक्षा सूत्र बांधती हैं और बदले में भाई जीवन भर उनकी रक्षा करने का वचन देते हैं। रक्षा बंधन को राखी या सावन के महिने में पड़ने के वजह से श्रावणी व सलोनी भी कहा जाता है। रक्षाबंधन का त्योहार 22 अगस्त 201 दिन रविवार को मनाया जा रहा है।

हमीद अख्तर उर्फ सोनू, मुखिया प्रत्याशी, ग्राम पंचायत, मदनपुर

 

हिन्दू पंचांग के अनुसार, राखी हर साल श्रावण माह की पूर्णिमा तिथि को बांधी जाती है। हिन्दू धर्म में इस त्योहार का विशेष महत्व होता है। रक्षाबन्धन भारतीय धर्म संस्कृति के अनुसार रक्षाबन्धन का त्योहार श्रावण माह की पूर्णिमा को मनाया जाता है। यह त्योहार भाई-बहन को स्नेह की डोर में बांधता है। इस दिन बहन अपने भाई के मस्तक पर टीका लगाकर रक्षा का बन्धन बांधती है, जिसे राखी कहते हैं।

रक्षाबन्धन

एक हिन्दू व जैन त्योहार है जो प्रतिवर्ष श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। श्रावण (सावन) में मनाये जाने के कारण इसे श्रावणी (सावनी) या सलूनो भी कहते हैं। रक्षाबन्धन में राखी या रक्षासूत्र का सबसे अधिक महत्त्व है। राखी कच्चे सूत जैसे सस्ती वस्तु से लेकर रंगीन कलावे, रेशमी धागे, तथा सोने या चाँदी जैसी मँहगी वस्तु तक की हो सकती है। रक्षाबंधन भाई बहन के रिश्ते का प्रसिद्ध त्योहार है, रक्षा का मतलब सुरक्षा और बंधन का मतलब बाध्य है। रक्षाबंधन के दिन बहने भगवान से अपने भाईयों की तरक्की के लिए भगवान से प्रार्थना करती है। राखी सामान्यतः बहनें भाई को ही बाँधती हैं

रक्षाबंधन

परन्तु ब्राह्मणों, गुरुओं और परिवार में छोटी लड़कियों द्वारा सम्मानित सम्बंधियों (जैसे पुत्री द्वारा पिता को) भी बाँधी जाती है। कभी-कभी सार्वजनिक रूप से किसी नेता या प्रतिष्ठित व्यक्ति को भी राखी बाँधी जाती है। रक्षाबंधन के दिन बाजार मे कई सारे उपहार बिकते है, उपहार और नए कपड़े खरीदने के लिए बाज़ार मे लोगों की सुबह से शाम तक भीड होती है। घर मे मेहमानों का आना जाना रहता है। रक्षाबंधन के दिन भाई अपने बहन को राखी के बदले कुछ उपहार देते है। रक्षाबंधन एक ऐसा त्योहार है जो भाई बहन के प्यार को और मजबूत बनाता है, इस त्योहार के दिन सभी परिवार एक हो जाते है और राखी, उपहार और मिठाई देकर अपना प्यार साझा करते है।

‘भइया मेरे राखी के बंधन को निभाना, भैया मेरे छोटी बहन को न भुलाना , सुमन कल्याणपुरी और लता मंगेशकर द्वारा गाया गया रक्षाबंधन का ये गीत भले ही ज्यादा पुराना न हो पर भाई की कलाई पर राखी बांधने का सिलसिला सदियों पुराना है, जो आज भी कायम है। पंडित लाल मोहन शास्त्री , दीपक शास्त्री,हिमांशु दुबे ने बताया कि भाई राखी बंधवा बहन की रक्षा का भार अपने उपर लेता है ।ऐसे ब्राह्मण के लिए यह महीना भर महत्वपूर्ण होता है अपने अपने घर में कूल देवता की पूजा करते हैं ।सभी लोग सावनी पूजा का विशेषता जानते हैं ।

रक्षाबंधन

कुछ लोग के यहाँ सावनी पूजा-किए बिना कराही में पकवान भी नहीं बनाया जा सकता है ।त्योहार का महत्व सिर्फ भाई और बहन तक ही सिमटा हुआ नहीं है, बल्कि इसका धार्मिक, पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व भी है। यही कारण है कि इस शुभ पर्व को मान्यताओं और मुहूर्त के अनुसार मनाते हैं

क्या है पौराणिक महत्व:

पंडित लाल मोहन शास्त्री ने बताया कि रक्षा बंधन का इतिहास हिंदू पुराण कथाओं में है। वामनावतार नामक पौराणिक कथा में रक्षाबंधन का प्रसंग मिलता है। राजा बलि ने यज्ञ संपन्न कर स्वर्ग पर अधिकार का प्रयत्न किया,तो देवराज इंद्र ने भगवान विष्णु से प्रार्थना की। विष्णु जी वामन ब्राह्मण बनकर राजा बलि से भिक्षा मांगने पहुंच गए। गुरु के मना करने पर भी बलि ने तीन पग भूमि दान कर दी।वामन भगवान ने तीन पग में आकाश-पाताल और धरती नाप कर राजा बलि को रसातल में भेज दिया। उसने अपनी भक्ति के बल पर विष्णु जी से हर समय अपने सामने रहने का वचन ले लिया। लक्ष्मी जी इससे चिंतित हो गई। नारद जी की सलाह पर लक्ष्मी जी बलि के पास गई और रक्षासूत्र बाधकर उसे अपना भाई बना लिया। बदले में वे विष्णु जी को अपने साथ ले आई। उस दिन श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि थी। इसकी अन्य कथाएं भी हैं।

रक्षाबंधन

अंशु प्रिया का कहना है कि भाई और बहन का प्यार को एक सूत्र में बंधकर अजीवन चलते रहने का प्रतीक है उसी का नाम रक्षाबंधन है भाई और बहन का यह त्यौहार लंबे दिनों तक याद रखने का कर्तव्य याद करता है। सुमन कुमारी का कहना है कि भाई बहन का यह बंधन जीवन का डोर है एक जगह से दूसरी जगह जाने के बावजूद भी रक्षाबंधन के दिन एक साथ ला देता है। और पुनः भाई बहन का प्यार को एक साथ मिला देता है ।

शर्मिला कुमारी का कहना है कि रक्षाबंधन का त्यौहार हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखा जाता है ।रक्षाबंधन का शाब्दिक अर्थ ही रक्षा करने वाला धर्म है जो अपने भाई के लिए बहन तथा बहन के लिए भाई हमेशा समर्पित रहते हैं। नूतन पांडेय का कहना है कि रक्षाबंधन का त्यौहार मजबूती और स्तंभ को कायम करने के लिए हर भाई-बहन 1 वर्ष पर पुनः एक साथ होते हैं और हर पुरानी यादें पुनः ताजा हो जाती है और बहने अपने भाई के कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर आजीवन सुरक्षित रहने का संकेत देती है। साधुरी कुमारी का कहना है कि भाई बहन का प्यार रक्षाबंधन में और बढ़ जाता है। जब अपने भाई के लिए बहन दूसरी जगह से आकर अपनी प्रेम की नौ छावर कर देती है। तथा अपने भाई की सुरक्षा के लिए उनके कलाई पर आजीवन सुरक्षित रहने के लिए धागा बंधती है। माधुरी कुमारी का कहना है कि रक्षाबंधन भाई बहन के रिश्ते का प्रसिद्ध त्योहार है रक्षा का मतलब सुरक्षा और बंधन का मतलब बाध्य होता है। रक्षाबंधन के दिन बहने भगवान से अपने भाइयों के तरक्की के लिए भगवान से प्रार्थना करती है। रीना कुमारी का कहना है कि रक्षाबंधन का त्यौहार परंपरिक रूप से भाई बहनों का स्नेह को बनाए रखने के लिए तथा अपने भाई के सुरक्षा के लिए उनके दुश्मनों से लड़ने के लिए कलाइयों को मजबूती प्रदान करने के लिए रक्षाबंधन का त्यौहार मनाकर भाइयों को हौसला को बढ़ाने का कार्य किया जाता है। हेवन्ति कुमारी का कहना है कि बहनें अपने भाई के लिए समर्पित सुरक्षा के लिए रक्षाबंधन का त्यौहार मनाती है कई जगहों से पुनः अपने भाई के पास बहने पहुंचकर उसकी सुरक्षा के लिये हाथों पर रक्षा सूत्र बांधकर आजीवन सुरक्षित रखने का वचन निभाती है और यह कहती है कि भाई अगर जिंदा है तो बहन भी सुरक्षित है। दाउदनगर शहर के मौलाबाग स्थित लक्ष्य कोचिंग सेंटर के निदेशक डॉ ओम प्रकाश कुमार का कहना है कि भाई और बहनों का यह पवित्र त्यौहार आजीवन भूलने वाला नहीं है जब-जब हम दोनों भाई बहन आपस में एक साथ मिलते हैं.वही बचपना नटखट यादें तरोताजा हो जाती है। वह अपने भाई की सुरक्षा के लिए उनकी कलाइयों को मजबूत करने के लिए तथा दुश्मनों से लोहा लेने के लिए उनके हाथों पर रक्षा का सूत्र बांधकर मजबूत इरादा प्रदान है। यह त्योहार भाई-बहन को स्नेह की डोर में बांधता है। इस दिन बहन अपने भाई के मस्तक पर टीका लगाकर रक्षा का बन्धन बांधती है, जिसे राखी कहते हैं। एक हिन्दू व जैन त्योहार है जो प्रतिवर्ष श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है।

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