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आज ही के दिन जब रणवीर सेना प्रमुख ब्रह्मेश्वर मुखिया का शव यात्रा निकला था तो पूरा बिहार जल उठा था,पढ़े और क्या-क्या हुई थी…

बिहार मे दशकों तक चले जातीय खूनी संघर्ष भला किसे याद नहीं होगा जब लोग रात-दिन इससे डरे और सहमे रहते थे । एक तरफ सवर्णों का  उग्रवादी संगठन रणवीर सेना था । जिसके प्रमुख ब्रह्मेश्वर मुखिया थें

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जे.पी.चन्द्रा की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट 

बिहार नेशन: बिहार मे दशकों तक चले जातीय खूनी संघर्ष भला किसे याद नहीं होगा जब लोग रात-दिन इससे डरे और सहमे रहते थे । एक तरफ सवर्णों का  उग्रवादी संगठन रणवीर सेना था । जिसके प्रमुख ब्रह्मेश्वर मुखिया थें तो दूसरी तरफ उग्रवादी संगठन एमसीसी. इस खूनी संघर्ष की गवाह रहे ब्रह्मेश्वर मुखिया की आज 9 वीं वर्षी है। आज ही के दिन ब्रह्मेश्वर मुखिया की गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई थी । ब्रह्मेश्वर मुखिया का घर बिहार के भोजपुर जिले के पवना थाना क्षेत्र के खोपिरा गाँव में है। यह आरा शहर के कतिरा-स्टेशन रोड में है.

वे रोज की तरह अपने घर से सुबह साढे़ चार बजे सुबह घर से घूमने निकले थें ।इसी दौरान उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी । इस घटना के कुछ ही घंटे बाद राज्य के कई जिलों में कोहराम मच गया था । चारों तरफ से हिंसा और आगजनी की खबरें आने लगी थी ।

लेकिन इस घटना के बाद सियासत बिहार से लेकर दिल्ली तक तेज हो गई थी । राजनीतिक हलचल तेज हो गई थी। कई तरह के इस हत्या को लेकर सवाल उठने लगे थें । बिहार के औरंगाबाद, गया , जहानाबाद और पटना सहित बिहार के कई जिलों में उग्रवादी संगठन रणवीर सेना के लोगों ने उपद्रव किया था । आरा को तो विशेष रूप से रणवीर सेना समर्थित उग्रवादियों ने टार्गेट किया था । स्टेशन से सर्किट हाउस तक को उग्रवादियों ने आग के हवाले कर दिया था । यहाँ तक की उस समय के तत्कालीन डीजीपी अभयानंद पर भी उन्मादी भीड़ ने हाथ उठा दिया था । विधायक से लेकर मीडियाकर्मियों तक को निशाना बनाया गया था ।शाम को उनका पोस्टमार्टम किया गया और उनके परिजनों को सौप दिया गया था ।

अगले दिन 2 जून दोपहर को उनकी शव यात्रा निकाली गई थी । जब उनकी शव यात्रा आरा से चली तो मुखिया समर्थकों का तांडव रूकने का नाम नहीं ले रहा था । आरा से शुरू हुआ तांडव बिहटा होते हुए सगुना मोड़ से पटना बांस घाट तक मुखिया समर्थकों का तांडव चला । उस दिन ऐसा लग रहा था जैसे पुलिस बेचार और बेबस थी । समर्थक तांडव मचा रहे थे , आगजनी कर रहे थे लेकिन पुलिस लाचार और बेबस थी । लोग अपने घरों में डरे हुए और सहमे हुए थे । वे किसी अनहोनी की आशंका से डरे थे । कुछ उपद्रवी समर्थकों ने महिलाओं से भी अभद्रता की थी.

वहीं हत्या के बाद उनके पुत्र इंदूभूषण सिंह ने इस मामले में आरा के नवादा थाने मे मामला दर्ज कराया था । बाद मे इस मामले मे बिहार सरकार एसआईटी टीम का गठन जांच के लिये बैठाई थी लेकिन कुछ भी आरोपियों का न पता चला था । बाद में सरकार के अनुशंसा पर सीबीआई जांच बैठाई गई लेकिन अब तक कोई निष्कर्ष नहीं निकला । सीबीआई ने हत्यारों के सुराग के लिये सात सालों में तीन बार 10-10 लाख का इनाम भी रखा लेकर हत्यारे गिरफ्त से बाहर हैं। सीबीआई ने इस केस की जांच 2013 में शुरू की थी । इस बारे में उनके पुत्र इंदू भूषण का कहना है कि अबतक कई आईओ इस केस के बदल गये लेकिन अपराधी अभी भी नहीं पकड़े जा सके हैं ।

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