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पटना हाई कोर्ट ने बिहार सरकार को लगाई फटकार, कहा-अस्पतालों की स्थिति सुधारें..

बिहार में स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल कोरोना संक्रमण ने खोल कर रख दी है। सरकार के पास सुविधाओं की घोर कमी है। न उनके पास अस्पताल में स्टॉफ हैं न मशीन

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बिहार नेशन: बिहार में स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल कोरोना संक्रमण ने खोल कर रख दी है। सरकार के पास सुविधाओं की घोर कमी है। न उनके पास अस्पताल में स्टॉफ हैं न मशीन । मतलब भगवान् भरोसे यहाँ की स्वास्थ्य व्यवस्था चल रही है।

ये बात आज तब और सही साबित हुई जब बिहार सरकार ने खुद पटना हाई कोर्ट में एक सुनवाई दौरान जवाब पेश कर बताया ।  रिपोर्ट में सरकार ने कहा की राज्य के 38 जिलों में कुल 39 जिला अस्पताल हैं । लेकिन 16 अस्पतालों में ही सीटी स्कैन की मशीन है।

जबकि जिन 23 जिला अस्पतालों में सीटी स्कैन नहीं है उसमें राजधानी पटना के दो अस्पताल भी शामिल हैं । ये रिपोर्ट पटना हाई कोर्ट में बिहार सरकार ने उस समय पेश की जब कोरोना के संक्रमण से निपटने के लिये हाई कोर्ट अस्पतालों की मॉनिटरिंग कर रही है।

हाई कोर्ट में बिहार सरकार द्वारा जवाब में कहा गया कि  16 जिला अस्पतालों में  सीटी स्कैन काम कर रही है । साथ ही सरकार ने कोर्ट को 23 अस्पतालों में से 15 अस्पतालों में 31 जुलाई तक मशीन लगाने का आश्वासन दिया गया है।

वहीं पटना हाई कोर्ट ने इसपर असंतोष व्यक्त करते हुए कार्य में तेजी लाने का निर्देश दिया ।वहीं इस मामले में बिहार सरकार ने रिपोर्ट पेश करते हुए बताया कि  इन जिला अस्पतालों में सीटी स्कैन नहीं है..सुपौल, सिवान, गोपालगंज, जमुई, अरवल, जहानाबाद, लक्खीसराय, नवादा, शेखपुरा, शिवहर, दरभंगा और गुरु गोविंद सिंह अस्पताल (पटना सिटी), पूर्णिया , सहरसा, सीतामढ़ी , नरकटियागंज (पश्चिम चंपारण) , पूर्वी चंपारण , कटिहार , बांका, बक्सर, कैमूर, खगड़िया, जय प्रकाश नारायण अस्पताल (पटना ).

बिहार सरकार ने इन जिलों में 31 जुलाई तक सीटी स्कैन उपलब्ध हो जाने की बात कही है…नरकटियागंज (प. चंपारण ), पूर्णिया, खगड़िया, सुपौल, सिवान, गोपालगंज , जयप्रकाश अस्पताल पटना , सहरसा, सीतामढ़ी, कटिहार, पूर्वी चंपारण, बांका, बक्सर, कैमूर, जमुई।

 

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