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विशेष रिपोर्ट: कब तक लागू होगा स्कूली पाठ्यक्रम 10 प्लस टू के पैटर्न की जगह फाइव प्लस थ्री,ऐसा है शिक्षा का नया ढांचा

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जे.पी.चन्द्रा की विशेष रिपोर्ट

बिहार नेशन:  देश में जो नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के द्वारा स्कूलों के पाठ्यक्रम में बदलाव की सिफारिश की गई थी उसे जमीन पर उतारने का कार्य तेजी से शुरू कर दिया गया है। अब शिक्षा मंत्रालय इसमें और देरी नहीं करना चाहता । इसे इसी साल पूरा करने का लक्ष्य है। इस शिक्षा नीति में रटने की बजाय सीखने की समग्र प्रक्रिया पर जोर दिया गया है। इससे रटने और रटाने का पूरा खेल ही समाप्त हो जाएगा । लेकिन इस नई शिक्षा नीति में जो सबसे अहम बदलाव होना है वह है स्कूली पाठ्यक्रम को 10 प्लस टू के पैटर्न से निकालकर फाइव प्लस थ्री प्लस थ्री प्लस फोर के पैटर्न पर ले जाने का है।

शिक्षा मंत्रालय ने नेशनल कैरीकुलम फ्रेमवर्क (एनसीएफ) के लिए जो विशेषज्ञ टीम बनाई है, उसके मुखिया भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के पूर्व प्रमुख और देश के वरिष्ठ विज्ञानी के. कस्तूरीरंगन को बनाया है। बता दें कि यह वही कस्तूरीरंगन हैं जिनकी अगुआई में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति भी तैयार की गई है। मंत्रालय का मानना है कि यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि नीति के जरिये बदलाव के जो सपने देखें गए हैं वे पूरी तरह से ढांचे में आ सकें। शिक्षा मंत्रालय ने इसके साथ ही स्कूली ढांचा तैयार करने में जिन मूलभूत विषयों पर ध्यान देने पर जोर दिया है, उनमें 21वीं सदी की जरूरत को ध्यान में रखते हुए सोच आधारित विषयवस्तु को प्रमुखता देने, वैज्ञानिक सोच, समस्या समाधान, सहयोग और डिजिटल शिक्षा से जुड़े विषय शामिल हैं। साथ ही स्थानीय विषयवस्तु और भाषा को प्रमुखता से शामिल करने का सुझाव दिया गया है।

 

मौजूदा समय में 10 प्लस टू वाले स्कूली शिक्षा ढांचे में तीन से छह वर्ष की उम्र के बच्चे शामिल हैं क्योंकि अभी छह वर्ष की उम्र में बच्चों को सीधे कक्षा एक में प्रवेश दिया जाता है। लेकिन नए फाइव प्लस थ्री प्लस थ्री प्लस फोर के ढांचे में तीन साल की उम्र से ही बच्चों को शिक्षा से जोड़ा जाएगा। यानी अब जैसे ही बच्चा तीन साल का होगा, उसे आंगनवाड़ी या बालवाटिका में प्रवेश दिया जाएगा। जहां वह छह साल की उम्र तक पढ़ेगा। इसके बाद उसे पहली कक्षा में प्रवेश दिया जाएगा। स्कूली शिक्षा के नए ढांचे में पहला चरण फाउंडेशनल है, जो पांच साल का होगा। इसमें बच्चा तीन साल की उम्र से आठ साल की उम्र तक पढ़ाई करेगा। दूसरा चरण प्राथमिक चरण होगा, जो तीन साल का होगा। इसमें कक्षा तीन से कक्षा पांच तक की पढ़ाई होगी। तीसरा चरण मिडिल होगा और यह भी तीन साल का होगा। इनमें कक्षा छह से कक्षा आठ तक की पढ़ाई होगी। चौथा चरण सेकेंडरी होगा, जो चार साल का होगा और उनमें कक्षा नौ से बारहवीं तक की पढ़ाई होगी।

वहीं सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक स्कूली शिक्षा से जुड़े अधिकतर काम पूरे कर लिये गये हैं । अब इसकी उच्च स्तरीय कमिटी के द्वारा केवल समीक्षा होना बाकी है कि कहीं कोई अहम विषय तो नहीं छूट रहा है।

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