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रेल्वे कर्मी ने वृक्षारोपण पर कानून बनाने के लिए किया मांग

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अनिल कुमार

वृक्षारोपण नहीं करने पर सभी कर्मियों व अधिकारियों के काटे जाए एक माह की तनख्वाह, जिसकी जितनी तनख्वाह वे उतना करें वृक्षारोपण: शंकर दयाल सिंह
 
औरंगाबाद। वृक्षारोपण पर कानून बनाकर अनिवार्य रूप से पालन करने को लेकर आगे आए रेल्वे कर्मी। जूनून ऐसा की यदि वे खुद वृक्षारोपण नहीं कर पाते है तो उनका एक माह का तनख्वाह काट लिया जाए और तो और कानून के मुताबिक उनका दो डिसमिल जमीन भी सरकार अधिग्रहित करें। वैसे वे मूल रूप से सदर प्रखण्ड के फेसर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आलमपुर गांव के रहने वाले है जिनका नाम शंकर दयाल सिंह है और वे एक रेल्वे कर्मचारी के तौर पर सिंकदराबाद में पदस्थापित है जिन्होंने पर्यावरण सुरक्षा व तकनिकी रोजगार हेतू किसान एवं अन्य केन्द्रीय व राज्य कर्मियों को पर्यावरण बचाओं मुहीम के तहत वृक्षारोपण को लेकर सभी को अपील किया है। श्री सिंह ने अनिवार्य रूप से वृक्षारोपण पर कानून बनाने को लेकर बिहार सरकार, भारत सरकार, केन्द्रीय पर्यावरण मंत्री, यूएनओं सहित अन्य अंतराष्ट्रीय संगठन को पत्र लिखा है। साथ में कहा है जिसकी जितनी तनख्वाह उन कर्मियों व अधिकारियों को उतने वृक्षारोपण करना चाहिए। यदि वे ऐसा करने में असक्षम है तो उन्हें अपने जीवन में कम से कम दो वृक्ष जरूर लगाना चाहीए। श्री सिंह ने कहा है कि इसे प्रमुखता से लागू किया जाए और वृक्षारोपण नहीं करने वाले कर्मीयों व अधिकारियों के तनख्वाह से एक माह का वेतन काट लिया जाए और उन पैसों से सरकारी खाली पड़े जमिन पर मजदूरों द्वारा वृक्षारोपण कराये जाय। ऐसे में रोजगार का सृजन होगा और पर्यावरण में भी बेहतर सुधार होंगे। पेड़-पौधों की कमी से निरंतर पर्यावरण संतुलन बिगड़ रहा है। धरती पर जीवन तभी संभव है, जब हरियाली होगी। ऐसे में सरकारी कर्मयों के अलाव आम जनमानस का भी उत्तरदायित्व है कि वह अधिक से अधिक वृक्षारोपण कर पर्यावरण को बचाएं। हम सभी का फर्ज बनता है कि पृथ्वी की खूबसूरती को बनाए रखने में अपना योगदान दें क्योंकि पर्यावरण में जितना महत्व मनुष्यों का है, उतना ही अन्य जीव-जन्तुओं का भी। अकेले मानवों के अस्तित्व के लिए भी पेड़-पौधो की उपस्थिति अनिवार्य है। प्राणवायु ऑक्सीजन हमें इन वनस्पतियों के कारण ही मिलती हैं। वैज्ञानिक गतिविधियों के कारण पर्यावरण संतुलन बिगड़ रहा है। साथ ही कभी औद्योगिकीकरण के नाम पर तो कभी शहरीकरण के नाम पर पेड़ो की अंधाधुंध कटाई हुई है। बढ़ती जनसंख्या के कारण भी पर्यावरण संकट गहराता जा रहा है। लोगों को वन संरक्षण पर ध्यान देना चाहिए। वन पर्यावरण के लिए महत्वपूर्ण हैं। आय में बढ़ोतरी: श्री सिंह ने कहा कि वृक्षारोपण को हर हाल में अनिवार्य कर दिया जाए तो निश्चित रूप से राज्य सरकार व भारत सरकार की आय में भी बढ़ोतरी होगी। जानवर और कृषि में सतत विकास होगा। घरेलू आवश्यकताओं की पूर्ति होगी। पशु पक्षियों की संख्या में भी बढ़ोतरी होगी एवं प्राकृतिक आपदा से लोगों को सुरक्षा मिलेगा। श्री सिंह ने कहा कि यदि वृक्षारोपण नहीं करता हूँ तो मेरे एक माह की तनख्वाह काट लिया जाए और यही नहीं बिहार सरकार मेरा दो डिसमिल जमीन भी अधिग्रहित कर ले। श्री सिंह ने कहा है कि जिस प्रकार से दवा खाने के बाद पेट में काम करती है ठीक उसी प्रकार जंगल के औषधि रूपी वृक्ष को वृहद पैमाने पर लगाये जाए ताकि वह ससमय कार्य करें। हर प्रश्न का हल होगा आज नहीं अभी होगा खुद पर विश्वास हैं तो रेगिस्तान में भी जल होगा। श्री सिंह ने कहा है कि देश और दुनियां के कई राष्ट्रों ने वर्ष 1992 में क्योटो प्रोटोकॉल और फिर 2015 के पेरिस समझौते बाद पर्यावरण सुरक्षा व संरक्षण के मुहीम में तत्पर है जबकि हम अपनी पर्यावरण सुरक्षा की शुरुआत कब करेंगे। इस मामले में बाते खूब बड़ी-बड़ी की जाती है जबकि वे सारी बातें फाइलों में ही दम तोड़ देती हैं। पर्यावरण सुरक्षा व संरक्षण का सीधा संबंध है हमारे आसपास जिवन से है। यदि पर्यावरण सुरक्षित होगी तभी हमारा जीवन सुरक्षित रहेगा। जंगलों के विनाश के कारण भूस्खलन सहित अन्य प्राकृतिक घटनाओं में लगातार वृद्धि हो रही है। इन घटनाओं के बाद भी शासन प्रशासन नहीं चेता है।
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