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पहले बाप ने अस्पताल की चौथी मंजिल से बेटे को फेंका फिर खुद भी कूदकर दे दी जान

पैसे की विवशता क्या होती है यह वही बता सकता है जिसने झेला है. बहुत से ऐसे लोग आपको मिल जाएंगे जो नशा या अन्य कामों में पैसे की बर्बादी करते हैं लेकिन किसी की जिन्दगी नहीं बचाते हैं.

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जे.पी.चन्द्रा की रिपोर्ट 

बिहार नेशन: पैसे की विवशता क्या होती है यह वही बता सकता है जिसने झेला है. बहुत से ऐसे लोग आपको मिल जाएंगे जो नशा या अन्य कामों में पैसे की बर्बादी करते हैं लेकिन किसी की जिन्दगी नहीं बचाते हैं. एक ऐसा ही मामला आया है उतर प्रदेश के बरेली से,जहाँ एक पिता ने पैसे की अभाव में पहले 10 साल के बेटे दिव्यांश को अस्पताल की चौथी मजिल से फ़ेंक दिया और फिर खुद कूदकर जान दे दी. जैसे ही इस घटना की सुचना परिवार के लोगों को मिली कोहराम मच गया. अस्पताल परिसर में भीड़ जुट गई.

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मिली जानकारी के मुताबिक़, गंगाशील अस्पताल की चौथी मंजिल से दीपक नाम के व्यापारी ने पहले 10 साल के बेटे को नीचे फेंक दिया और फिर खुद कूदकर जान दे दी. यह भी बताया जा रहा है कि व्यापारी को नशे का लत थी और उसकी मानसिक स्थिति भी खराब थी. तीन दिन पहले ही इलाज के लिए उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया था. आज ही उसे डिस्चार्ज भी होना था. इसके चलते बच्चा अपनी बुआ के साथ अस्पताल पहुंचा था.

वहीं इस मामले में परिवार के सदस्यों ने बताया कि दीपक बरेली में ही कन्फेक्शनरी की दुकान चलाता था और लॉकडाउन के चलते सारा व्यापार ठप चल रहा था. जबकि अस्पताल में रोज बिल देना मुश्किल हो रहा था. आज ही उसे अस्पताल से डिस्चार्ज किया जाना था. उसका 10 साल का बेटा दिव्यांश अपनी बुआ के साथ ही अपने पिता को डिस्चार्ज कराने पहुंचा था. लेकिन उसने इस घटना को अंजाम दे दिया.

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