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“जाप” नेताओं ने पप्पू यादव की रिहाई समेत पांच मांगों को लेकर किया जोरदार प्रदर्शन

: बिहार में जन अधिकार पार्टी के नेता पप्पू यादव की रिहाई का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है. लगातार उनकी रिहाई को लेकर पार्टी के नेताओं, कार्यकर्ताओं और समर्थकों द्वारा आन्दोलन किया जा रहा है

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जे.पी.चन्द्रा की रिपोर्ट

बिहार नेशन: बिहार में जन अधिकार पार्टी के नेता पप्पू यादव की रिहाई का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है. लगातार उनकी रिहाई को लेकर पार्टी के नेताओं, कार्यकर्ताओं और समर्थकों द्वारा आन्दोलन किया जा रहा है. रविवार को जाप के नेताओं ने पप्पू यादव की रिहाई समेत पांच मांगों को लेकर औरंगाबाद जिला में जोरदार प्रदर्शन किया. नेताओं ने पप्पू यादव के रिहाई की तत्काल मांग की.

इस मौके  पार्टी के के प्रदेश सचिव संजय यादव ने कहा कि हम सभी नीतीश कुमार की सरकार जो निरंकुश हो चुकी है उनसे मांग करते हैं कि हमारे नेता एवं गरीबों के मसीहा पप्पू यादव को गलत तरीके से राज्य सरकार ने जेल भेज कर गरीबों की आवाज को दबाने का कार्य किया है. वह उन्हें अविलम्ब रिहा करे. राज्य सरकार पर तानाशाही का आरोप लगाते हुए जाप प्रदेश सचिव ने कहा कि नीतीश सरकार पूरी तरह से हर मोर्चे पर फेल हो चुकी है.

वहीं औरंगाबाद जिला के जाप के युवा परिषद के जिलाध्यक्ष विजय कुमार उर्फ़ गोलू यादव ने कहा कि सरकार से हमलोगों की पांच मांग हैं. नेताओं ने कहा कि जब स्कूलों में पढाई नहीं हो रही है तो फिर शुल्क कैसा ? वहीं दुसरी मांग यह है कि अस्पतालों की व्यवस्था दुरूस्त किया जाय. कोरोना जैसी महामारी ने इसकी पोल खोलकर जनता के सामने रख दी है. तीसरी मांग है कि मनरेगा कार्य को सरकार कृषी कार्य से जोड़े. चौथी मांग है कि नौकरी दी जाय नहीं तो बेरोजगारी भता दी जाय. जबकि पांचवी मांग हमलोगों की है कि सबके सेवक पप्पू यादव को रिहा की जाय.

आपको बता दें कि इस समय “जाप” सुप्रीमों पप्पू यादव को 32 साल एक पुराने मामले में पुलिस ने गिरफ्तार कर रखा है. हालांकि उनकी स्वास्थ्य को देखते हुए हिरासत में ही दरभंगा के डीएमसीएच अस्पताल में उन्हें रखा गया है. जहाँ उनका इलाज चल रहा है. लेकिन उनके पार्टी के नेता, समर्थक और कार्यकर्ता लागातार रिहाई को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं.

गौरतलब है कि जाप सुप्रीमों पप्पू यादव ने कोरोना संक्रमण के दौरान अस्पतालों की पोल खोलकर सरकार की खूब किरकिरी कराई थी. वे लगातार गरीबों और कोरोना पीड़ितों की मदद कर रहे थें. हालांकि एनडीए के कई नेताओं ने भी उनकी रिहाई की मांग कई बार की है. वहीं इस मामले में जनता का कहना है कि उन्हें नीतीश सरकार ने एक साजिश के तहत अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए गिरफ्तार करवाई है ताकि सरकारी अव्यस्था की पोल न खुल सकें.

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